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पूर्ण आजादी की अभिलाषा

Posted On: 11 Aug, 2017 लोकल टिकेट में

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स्वतंत्रता दिवस का महापर्व आने वाला है. सर्वत्र हर्षोल्लास व्याप्त है. सम्पूर्ण देशवासी इस राष्ट्रीय पर्व की व्यग्रता से प्रतीक्षा कर रहे हैं. लेकिन साथ में दहशत भी है . पता नहीं आतंकवादी कुछ उपद्रव न कर दे, निरीह मानव को जान न गंवाना पड़े, तहस नहस न हो जाये . आगमन की जितनी प्रसन्नता होती है उतना ही तनाव भी. अभी से ही भयाक्रांत करने की साजिश कर रहे हैं गुप्त शत्रु. पाकिस्तान सदृश यदि पडोसी हो तो भय होना स्वाभाविक ही है. लेकिन शत्रु ये भूल जाते हैं कि यह गाँधी, तिलक, नेहरू आदि जैसे वीर सपूतों का देश है. इस देश के लाडले अंग्रेजों के दमन , शोषण तथा अत्याचारों से पीड़ित होकर सिसकियाँ लेते हुए दासता के जीवन से मुक्त किया अपने देश को, इस देश के सपूतों ने लोहे के चने चबवा दिए थे दुश्मनों को.
स्वतंत्रता की इस बलिवेदी पर अनगनित लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी, अनेक माताओं की गोद सूनी हो गयी थी. देश के हर नर-नारी , बाल-वृद्ध सभी अपनी खोयी हुयी स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए प्राणों की आहुति दे दी. गाँधी,तिलक,सुभाष ,चंद्रशेखर आजाद,नेहरू तथा असंख्य अनाम विभूतियों के त्याग और बलिदान के कारण यह देश स्वतंत्र हुआ. अंततः १५ अगस्त १९४७ को देश आजाद हुआ .
देश के हर भागों में राष्ट्रीय पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन विविध राज्यों में सांस्कृतिक तथा रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. सरकारी स्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाते हैं. दुल्हन की तरह देश के कोने-कोने को सुसज्जित किया जाता है. रात्रिकाल में देश कालिदास के ‘मेघदूत’ के अलकापुरी से भी अधिक मनोहारी दृष्टिगत होती है. लेकिन विगत कुछ वर्षों से आतंकवादरूपी नृशंस मानव के संगठनों ने आतंक फैला रखा है. जितनी प्रसन्नता से इस पावन पर्व के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं उतना ही देशवासी आतंकित भी रहते हैं. पता नहीं किस तरफ से सरहद पार कर घुसपैठिये नरपिशाच आकर तबाही मचा दे . उन दरिंदों को मात्र दहशत फैलाना आता है. हमारे वीर जांबाजों से भयभीत भी नहीं होते, डरे भी कैसे उनका मुख्य कार्य यही तो है आतंकित करना. बुजदिल कर भी क्या सकता है.
आजादी के मायने भी परिवर्तित होते जा रहे हैं. कुछ लोग देश के प्रति समर्पित नहीं हैं, स्वार्थ में अंधे हो कर कुकृत्य भी करते रहते हैं. विगत कुछ दिनों कि गतिविधि पर ही दृष्टि डालें तो देश में घटित होनेवाली कितनी ही अकल्पनीय घटनाएं चलचित्र की तरह आँखों के आगे चलने लगती है. अभी कुछ दिन पूर्व देश की राजधानी क्षेत्र स्थित इंदिरापुरम के जी.डी. गोयनका स्कूल में मासूम बच्चे ‘अरमान’ की हत्या कितनी शर्मनाक है, स्कूल वाले सही बातें भी नहीं बता रहे हैं. गोयनका स्कूल ही नहीं , बहुत सारे स्कूल में ऐसी वारदातें होती रहती है. क्या इसी दिन के लिए हमारे देश के महापुरुष शहीद हुए?
सबसे अधिक तो देश की महिलाये असुरक्षित हैं. एक माह की बच्ची से लेकर मृत्यु शैय्या पर लेटी महिला भी असुरक्षित है. हर दिन समाचार- पत्र या दूरदर्शन में महिलाओं के साथ घटित घिनौनी हरकतों के बारे में पढ़ने या देखने को मिलती है. कहीं महिला के साथ बलात्कार तो कहीं तीन तलाक के कारण पीड़ित महिला , कहीं दहेज़ केलिए प्रताड़ित होती महिला तो कहीं घरेलु हिंसा कि शिकार होती महिला जैसे बहुत सारे अन्य अत्याचारों को झेलने को मज़बूर हैं इस देश की महिलाये. क्या इसी दिन के लिए आजाद हुए हम? चोरी , डकैती , लूटमारी,अपहरण आदि तो आम बातें हैं. क्या इसीलिए आजादी मिली? क्या यही आजादी के मायने हैं. कृषक को आत्महत्या करना पड़े तो ऐसी आजादी का क्या मतलब है? भ्रष्टाचारियों के विरोध करने वालों ki हत्या हो! क्या यही आजादी है. स्वतंत्र पत्रकार मारे जाएँ! क्या यही आजादी है? देश के अर्थव्यवस्था में विदेशी एम्.एन. सी. कंपनियों को लूटने का अधिकार देना और स्वदेशी कपंनिया विदेशियों के हवाले हो जाना ! आजादी है? ये एम्.एन. सी.वाले केवल कमाई करते हैं और यहाँ तक कि कार्यरत कर्मचारियों को एक ही झटके में निकाल बाहर कर देते है, क्या यही है आजादी? गरीबी, भूखमरी , बीमारी , आदि से देश के जनसमूहों कीisyahi मृत्यु होती रहती है , क्या यही है आजादी? नशे के व्यापर में लिप्त लोगों द्वारा युवा समूह को गुलाम बनाना , क्या यही है आजादी?इसी दिन के लिए हमारे वीर सपूतों ने कुर्बानी दी
ठीक है हमें अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली है. हमें इसका उत्सव मनाना भी चाहिए पर हमें यह भी प्रयत्न करनी चाहिए कि केवल राजनैतिक आजादी या शासन करने की आजादी ही पूर्ण आजादी नहीं है, हमें पूर्ण आजादी के लिए और भी संघर्ष करने की आव श्यकता है. हम पूर्ण आजाद तभी हो सकते हैं जब हमें आजादी मिलेगी गरीबी से , भूखमरी से, बीमारी से , भ्रष्टाचारी से , अत्याचारी से , विदेशी व्यापारी से, विदेशी शिक्षा से, विदेशी उत्पादों से, विदेश की नौकरी से, और भ्र्ष्ट राजनेताओं से भी.



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