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किसान आंदोलन

Posted On: 21 Jun, 2017 लोकल टिकेट में

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कुछ दिनों से दूरदर्शन पर विज्ञापन आ रहा है – “घंटी अभी बजी नहीं ,किसान अभी मरा नहीं” आदि आदि ,यह आज के परिपेक्ष्य में सही है ,मध्य प्रदेश का आंदोलन जीबन्त उदहारण है .किसान आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया है, इसके जिम्मेवार कौन ???
आज हिंसक रूप ले लिया था ,ह्रदय विदारक मौतें ,सिसकते परिजन ,किंकर्तव्यविमूढ़ देशवासी ,बिलखते बच्चे ,रोती कलपती पत्नी और माताएँ ,आखिर इसके उत्तरदायी कौन ??
मेरी दृष्टि में राजनेता लोग ,अपनी रोटी सेंकने के लिए , वोट बैंक बढ़ाने के लिए , ये पदलोलुप बिना चिंतन किये, बिना सोचे समझे वायदा कर डालते हैं की यदि जीतूंगा तो ये कर दूंगा तो वो कर दूंगा . अर्थात जादू का पिटारा खोल दूंगा ,एक से एक मनभावन वायदे ,जिसमे कभी हल नहीं होने वाले समस्याओं की ऐसी व्याख्यान जैसे चुनाव जितने के बाद चुटकियों में समाधान हो जायेगा ,जैसे मंहगाई की समस्या ,बेरोजगारी ,आरक्षण की समस्या आदि विविध समस्याएँ ,उसमे कृषक की समस्या भी अति गंभीर है ,
यह सर्वविदित है की किसान अति निश्छल ,सज्जन और निष्कपट होते हैं ,अपनी दृष्टि से वे सभी को देखते हैं ..अपने सदृश वे दूसरे को भी समझते हैं .नेता लोगों के कपोल कल्पित भाषण को सत्य मान लिए कि कर्ज तो माफ़ होगी ही क्योंकि चुनाव के समय वायदे किये थे ,इस कारण ही कितनों ने वोट भी दिए थे . अपना अमूल्य वोट इसी आशा में देकर विजयी बनाये थे कि उन्हें राहत मिलेगी .
निर्विकारी और पवित्र आत्मा वाले किसान अपनी समस्याओं का समाधान नहीं होते देखकर टूट से गए , आहत हो गए. अपनी पार्टी को विजित होते देखकर मिथ्या भाषण को सत्य मानकर अपनी समस्या से अवगत करवाने का प्रयत्न करने लगे ,लेकिन मिथ्या घोषणा करने वाले स्वार्थ पूर्ति के बाद भूल गए ,लेकिन जरूरतमंद कैसे भूल सकते हैं ? स्मृति दिलाने कि कोशिश करते हैं लेकिन उपयुक्त फल प्राप्त नहीं होते देखकर विरोध करते हैं ,समस्या का समाधान नहीं होते देखकर आंदोलन करने लगते हैं .इसी कारण से मध्यप्रदेश के किसान आंदोलन करने पर मज़बूर हो गए . चरम सीमा पर है आंदोलन .दिलदहलादेनेवाली मौत से सम्पूर्ण देश आहत है ,फायरिंग में कुछ किसानो की मृत्यु से दारुण स्थिति उत्पन्न हो गयी थी .यत्र तत्र बंद कितने शहरों में भारी हिंसा ,वाहनों को तोड़ फोड़ ,आगजनी भारी हिंसा ,आदि भारी क्षति होने से अन्य लोग दहशत में है ,क्षुब्द है .
आंदोलन के आरम्भ में ही सरकार को सजग हो जाना चाहिए .पहली बार तो यह घटना हुई नहीं है .यदि समय रहते सरकार सजग हो जाय तो इतनी बड़ी घटना नहीं होगी .इतने लोगों की मृत्यु नहीं होती ,सरकारी सम्पत्तियाँ नष्ट नहीं होती आशय यह की इतनी बड़ी सुनामी नहीं आती .
यह कहावत अक्षरशः सत्य है की निश्छल मानव बहुत जल्दी लोगों पर विश्वास कर लेते हैं . किसी के मिथ्या प्रलोभन को भी सत्य मान लेते हैं , उसे असत्य होते देखकर कुछ भी कर गुजरते हैं .वही हुआ अपनी मांग पूर्ण होते नहीं देखकर मांग के लिए विरोध प्रदर्शन करके अपना हक़ मांगना ,लेकिन प्रशासन के सख्त रुख को देखकर अपना संतुलन खो देना कोई आश्चर्य नहीं ,फलस्वरूप ट्रक फूंकना ट्रेन रोकना ,मार्ग अवरुद्ध करना आदि ,प्रशासन असंयमित होकर आंसू गैस छोड़ना फिर लाठी चार्ज ,बेकाबू भीड़ पर मज़बूरी में गोली चलाना फिर निर्दोषों को जान गंवाना ,मौत की गोद में सोनेवाले के परिजनों की दारुण स्थिति ,उनसबके बच्चों को पिता की साया से वंचित रहना ,दर दर भटकने की स्थिति उत्पन्न होना ,हमारे देश की अन्नदाता की ऐसी स्थिति को देखकर आहत होना , आखिर इसके जिम्मेदार कौन? मात्र ये राजनीति दल के राजनेता .अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए देश के कुछ लोगों को लालची बनाना .इतना ही नहीं भविष्य भी दांव पर लगा रहे ,आगामी पीढ़ी भी आलसी हो जाएगी . अपने माता पिता को कर्ज न चुकाने की प्रवृत्ति को देखकर बच्चे भी सोचेंगे ऋण लेने में कोई परेशानी नहीं होगी,आंदोलन करेंगे और समाधान मिल जायेगा .लालच की प्रवृत्ति में कमी के स्थान पर वृद्धि ही होगी ,
इन सब के पीछे राजनेता की गलत सोच और अपने पद के लिए असत्य सम्भासण,मिथ्या प्रलोभन .चुनाव तो होते ही रहते हैं कभी एम् पी ,कभी एम.एल ए., कभी कभी किसी राज्य का कभी किसी राज्य के विधान सभा तो कभी नगरनिगम का चुनाव .हर चुनाव के पीछे झूठी वायदे झूठे प्रलोभन यानी झूठ के पुलिन्दे
अगर यही स्थिति रही तो कुछ सालों में अराजकता फ़ैल जाएगी ,किसी पर कोई विश्वास नहीं करेगा ,असत्य का बोलबाला हो जायेगा क्योंकि समाज में लोग राजनेता को आदर्श मानते हैं ,अनुकरण करते हैं
यदि यही स्थिति रही तो कभी किसान तो कभी बेरोजगार तो कभी वेतनवृद्धि के लिए शिक्षक तो कभी फीस कम करने के लिए अभिभावक ,आशय यह कि हर समुदाय के लोग अपनी – अपनी मांग को लेकर हंगामा करते रहेंगे .आखिर हारेंगे तो हम देशवासी ही .भुगतना तो पड़ेगा ही .अतः झूठे वायदों के पीछे नहीं कठिन कर्म के आधार पर आगे बढ़ेंगे .
अन्नदाता तो दाता है उसे क्यों किसी के समक्ष हाथ फैलाना होगा ?
अब भी जागो राजनेता लोग सच्चे लोगों को झूठे वायदे में मत उलझाओ ,जितना कर सकते हो करो उतना ही बोलो कोई भी पार्टी के हों अपनी रोटी सेकने के लिए किसी के भावना से खिलवाड़ मत करो स्व हितार्थ को छोड़कर देशहितार्थ कार्य करें ,चुनाव के समय सच्चे वायदें करें जिससे सबका भरोसा हो अपने नेता पर .५ साल अच्छा कार्य करें, मत तो लोग आपके कार्य कुशलता पर देंगे ही .वास्तव में काम बोलता है .
दोनों और से देश की क्षति .



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