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अराजकता

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बदमाशों ने किया युवती का अपहरण,
हरियाणा में भयंकर विरोध,
आरक्षण रूपी महामारी से सम्पूर्ण हरियाणा जल उठा.
चार साल से सत्तर साल तक की महिला असुरक्षित ,
महिला से चेन खींची गयी ,
लूट-पाट,
नेताओं का एक दूसरे पर आरोप मढ़ना,
व्यापम घोटाला ,
स्पेक्ट्रम घोटाला,
ललित गेट,
कोल गेट ,नरसंहार,
जवानों का सरहद पर शहीद होना,
पाकिस्तान की घुसपैठ,
आतंकी हमलाएं,
चीन का घुसपैठ,
बुजुर्ग दम्पति की हत्या,
रोहित की आत्महत्या,
प्रेमिका पर तेजाब फेंकना,
मुर्थला के पीड़ित ,
हरियाणा के भीषण कांड में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की आशंका,
जे.एन.यु. में छात्र विरोध,
बिहार में इंजीनियरों की हत्या आदि हर दिन की खबरों की सुर्खियां.
ये दूरदर्शन या समाचार पत्रों में दिए गए या दिखाए गए समाचार की झलक है. यह भयावह रूप है अराजकता का. इस तरह की घटनाएँ वर्षों से निरंतर चली आ रही है. इसम कुछ नवीनता नहीं है. देश इस तरह की भयंकर समस्या से जूझती आ रही है. विपक्ष सत्तापक्ष को और सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए विपक्षों को आरोपों के कटघरे में डालकर निश्चिंत होकर पल्ला झाड़ते रहते हैं.
समस्या के समाधान से अधिक मजा नेताओं को एक दुसरे पर आरोप लगाकर अपने आप को निर्दोष प्रमाणित करने में आता है. मजे की बात तो यह है की ये दिग्गज नेता लोग यह कह कर विपक्ष को चुप कराने की कोशिश करते हैं की अमुक जब सत्ता में थे तो ये हुआ था वो हुआ था. हुआ था ! अरे हो रहा है इस पर क्यों नहीं सोचते ? उसने गलत किया इस आधार पर आप भी अगर गलत करें तो फिर आप को जनता द्वारा मौका देना गलत हो जायेगा. उनको छोड़ कर आप को मौका इसीलिए दिया गया है की आप वो न करें न होने देन जो उसने किया.
शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, इसका ध्यान किसी को नहीं है. छात्र आत्महत्या कर रहे हैं, उनकी दर्दनाक मृत्यु से अधिक चिंता सियासत करने में है. जे.एन.यू. जैसा श्रेष्ठ संस्थान जिसमें दाखिला मिलना गर्व की बात होती है. विदेशों में इसकी पहचान है, अधिकांश बच्चे की ख्वाहिस होती है इस उच्च संस्थान में अध्ययन करने की. ऐसी श्रेष्ठतम संस्थान में ऐसी ओछी हरकतें ! देश विरोधी नारे लगाना,आतंकबादी के समर्थन में बोलना – यह अराजकता नहीं है तो क्या है? छात्र का प्रमुख कार्य है अधययन . अधययन न करके ऐसी हरकतें अशोभनीय है, निंदनीय है.
ऐसी विपरीत परिस्थिति में सबको एकजुट हो कर सोचना चाहिए की कल के भविष्य हमारे इन विद्यार्थियों की मानसिकता इतनी तुच्छ क्यों हो रही है, इसके पीछे कारन क्या है? इतनी उदंडता क्यों कर रहे हैं? हर नागरिक को लज्जित होना चाहिए की ऐसे कुछ युवक क्यों हो रहे हैं? इनकी सोच इतनी संकीर्ण क्यों है?
सबको एकजुट होकर कारण की खोज करनी चाहिए न की सियासत. आगामी स्तर में ऐसी ओछी घटना की पुनरावृति न हो इस पर ध्यान देना चाहिए.
हमारा देश आदर्श रहा है. राम-कृष्ण के देश ऐसी निंदनीय कार्य! शांति से क्रांति के सिद्धांत का पालन कर ग़ांधी जी अमर ही नहीं हुए अथक परिश्रम से देश को स्वतंत्रता दिलवाई . सर्वस्व होमकर हमारे वीर सपूतों ने इस देश की रक्षा की है. जिस देश में मानव क्या पशु की भी हत्या निंदनीय मणि जाती है उस देश में ऐसा कुकृत्य ?
जिस देश में कभी शत्रु के घर में भी जानकी सुरक्षित रहीं उस देश में शीलभंग ,दुष्कर्म की घटनाएँ प्रतिदिन की खबर बन गयी है. सामूहिक दुष्कर्म जैसे रोज़मर्रा की घटना हो गयी हो. जहाँ राहजनी की बात भी अकल्पनीय थी वहां इतनी अधिक मात्र में घटनाएँ होने लगी है. यह अत्यंत चिंतनीय विषय है. लूट-पाट तो आम बात है, छोटी-छोटो बातों पर सांप्रदायिक दंगे हो जाते हैं.
जाति प्रथा का समूल नष्ट हो जाना चाहिए था लेकिन यह तो सुरसा के मुख की तरह निरंतर बढ़ता ही जा रहा है. आरक्षणरूपी गंभीर समस्या जातिप्रथा की ही तो देन है. कटोरी ले कर सड़क पर भीख मांगने वालों पर तरस तो आती है लेकिन आरक्षण मांगने वाले को पता नहीं कैसे भीख मांगने में लज्जा नहीं आती ? लज्जा क्या ये तो डंके की चोट पर भीख मंगाते हैं. यह अराजकता का ही एक रूप है.
अब पाप पुण्य का भेद तो रहा नहीं, समाज में धर्म के स्थान पर ढकोसला हो गया है. पहले के युग में लोग पाप करने से डरते थे अब तो जो जितना बड़ा पापी वह उतना बड़ा पाखंडी. छोटे – बड़े का लिहाज समाप्त ही हो गया है.स्त्रियों को यथोचित सम्मान नहीं मिलता है. समाज में धर्म का छोटे -बड़े का लिहाज ही लुप्त ही हो गया है . महिलाओं को उचित सम्मान नहीं मिलता .समाज में धर्म का स्थान धन ने ग्रहण कर लिया है .सर्वत्र धन की ही पूजा होती है .पहले विद्वान पूजित होते थे अब धनवान .
कमजोर कानून व्यवस्था भी अराजकता फ़ैलाने में अहम भूमिका निभाती है ,लचर कानून व्यवस्था के कारण अपराधी आज़ाद होकर घूमता रहता है . कुछ राजनीतिज्ञ भी भूमिका निभाते हैं ,असत्य भाषण एक भी कारण है . शिक्षकों तथा विद्वानों या प्रबुद्ध मानव को उचित सम्मान नहीं मिलता फलतः अराजकता बढ़ना स्वाभाविक ही है .इसका मुख्य कारण है नक़ल करने की प्रवृत्ति ,सफल मानव की सफलता से ईर्ष्या , विदेशों या पाश्चात्य सभ्यता का अनुकरण ,हमारे युवा पीढ़ी का स्वदेशी सामानों को छोड़कर विदेशी सामग्री के प्रति ललक ,उनके परिधान की नक़ल .पहले जिस तरह गुरुकुल के गुरु अपने छात्र को शिक्षित करते थे पुत्रवत स्नेह देते थे ,गुरु विश्वामित्र , अष्टावक्र याज्ञवल्क्य ,वशिष्ठ आदि की तरह गुरु की आज आवश्यकता है . आज के शिक्षक भी अपनी नैतिक जिम्मेवारी समझकर पुत्रवत मानकर शिक्षित करेंगे तो अराजकता में कमी होगी .
स्वार्थ की राजनीति से दूर होकर नेता लोग देश हितार्थ कार्य करेंगे तो लाभ अवश्य मिलेगा ,जनता अंधी या बहरी नहीं है ,वह सभी वस्तु स्थिति से अवगत है अतः पक्ष विपक्ष को नीचा दिखाकर ,विपक्ष में कमियाँ निकालकर जनता को भ्रमित करने की भूल न करें ,जनता विज्ञ है वह अपना नेता का चयन कर लेगी इसलिए उसे भ्रमित करने की भूल न कर संगठित होकर कार्य करने से निश्चित रूप से सफलता मिलेगी . अराजकता देश के लिए बदनुमा दाग है ,कलंक है.
प्राचीनकाल से ही स्त्रियों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता रहा है ,पर स्त्री को माता सदृश माना जाता रहा है,दूसरे के धन को तृण समान ,गुरु को गोविन्द से श्रेष्ठ समझा जाता था ,श्रवणकुमार सदृश मातृ पितृ भक्त पुत्र की आज आवश्यकता है ,राम कृष्ण की आवश्यकता है ,पुनः गांधी सदृश युग पुरुष चाहिए देश के लिए. अभी भी इस काले धब्बा से विमुक्त हुआ जा सकता है ,अभी भी देर नहीं हुई है हम सभी को एकजुट होने की आवश्यकता है .
संपूर्ण देशवासी मिलकर अराजकता की अहसहिष्णुता की समाप्ति हेतु समाज के मूलभूत ढांचे को परिवर्तित करने का प्रण लेकर समाज के असामाजिक तत्त्व को दूर कर आस्था की अलख जगाकर हर वर्ग का सम्मान करें . उत्कृष्ट शिक्षा की व्यवस्था ,कर्तव्यनिष्ठ मानव ,विद्वानों का उचित आदर ,मात्र अर्थ के पीछे न भागकर गुण का मह्त्व देकर सदन में पक्ष -विपक्ष रिपु सदृश नहीं मित्र सदृश आचरण करके आरक्षण रूपी दानव का भीख न देकर हर मानव के गुण को विकसित कर अपराध और असमानता को समूल नष्ट करने का संकल्प लें .
आईये सब संगठित होकर आपसी तनाव और कटुता भूलकर देश की उन्नति में बाधक न होकर देश के अराजकता को समूल नष्ट जड़ से ही दूर कर एक नविन धरा की या पुनः सतयुग सदृश हर मनुष्य,हर प्राणी को बनाने का दृढ संकल्प करें .

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jitendra Mathur के द्वारा
March 2, 2016

बहुत अच्छे विचार हैं रजनी जी आपके । स्तुत्य । अनुकरणीय । काश ऐसी सोच हमारे कर्णधारों में विकसित हो पाती ! जहाँ तक आरक्षण का प्रश्न है,  उसे तो अब भीख की तरह नहीं वसूली की तरह गुंडागर्दी करके माँगा (और पाया) जाता है ।


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